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kaushal vichar

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kaushalvijai


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जब दिल्ली बदल जाएगी,

Posted On: 1 Jan, 2013  
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जनरल डब्बा में

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बस हिंसा न अपनाना है।

Posted On: 24 Dec, 2012  
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हे ! अन्ना!तुम नहीं अकेले!

Posted On: 17 Aug, 2011  
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आरक्षण क्यूँ न हो !

Posted On: 12 Aug, 2011  
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जनरल डब्बा में

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भ्रष्टाचारियों भारत छोड़ो!

Posted On: 8 Apr, 2011  
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जनरल डब्बा में

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अन्ना की चिंगारी में!

Posted On: 6 Apr, 2011  
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जनरल डब्बा में

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अब भ्रष्टाचार मिटाना है!

Posted On: 5 Apr, 2011  
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जनरल डब्बा में

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धोनी की सेना ने लंका दहन किया है!

Posted On: 2 Apr, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा:

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के द्वारा: Mala Srivastava Mala Srivastava

कौशल जी, आपके जज़्बे और जज़्बात दोनों को नमन करने को जी चाहता है । क्रांति में होने वाली देर के लिये न तो देश दोषी है, न ही देश के युवा । भारतमाता के इन मक्कार लुटेरों ने इस लम्बे अंतराल में लूट की अपनी निर्विघ्न ज़मीन तैयार करने के लिये इस विशाल देश को दिलों और सरहदों के मामले में इतने टुकड़ों में बांट दिया है, जिनको जोड़ने के लिये कुछ राष्ट्रभक्तों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है । लेकिन अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि इन हरामखोरों को घेरने का समय काफ़ी नज़दीक आ चुका है । एक से दो महीनों में ही इनकी जड़ें खोदकर देश को दूसरी आज़ादी दिलाने के क्रांतिकारी चरण धरातल पर दिखने लगेंगे, जिसके प्रत्यक्षदर्शी हम सभी होंगे । साधुवाद ।

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के द्वारा: atharvavedamanoj atharvavedamanoj

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के द्वारा: chaatak chaatak

के द्वारा: chaatak chaatak

मन में है कुछ जबरदस्त लिखने को, मगर अभी वो भाव नहीं आया है, किसी दोस्त से मन-मुटाव चल रहा है ,जिससे वाकई मन मेरा बहुत भटका हुआ है. आपने मेरी कविता के साथ मेरा मन भी पढ़ लिया. काश ! आप जैसा दोस्त कोई मेरे पास भी होता. इस रचना पर गौर कीजिए: "नौ-महीने पेट में पाले, रक्त,मज्जा से हमे संभाले. असहनीय पीड़ा सहकर, जीवन के हर कष्ट खंगाले. माँ है! उनमे से कोई, बहन ,प्रेयसी ,भार्या या जीवन का किसलय सोई . किस रूप में इसे चाहते, यह तो निर्झर बहता जल है. जिस पात्र में धारण करते, उसी पात्र में इसका ढल है. क्या अनुदार,उदार,वात्सल्य, क्षमता,नमता,दया सुजास. अपने कोमल हाथो से, सृष्टि गढने का प्रयास. हाय ! तुम्ही हो सूरज,चंदा, इस जीवन में. और तुम्ही को बांधे फंदा, इस जीवन में. एक शर्त है , जो भी जारी करता फ़तवा. या वो सारी पंचायतों को. जो नित नियम बनाया करता. सारे फ़तवा ,नियम कायदे , उन नारियों पर आजमाओ. जिसको तुमने (पुरुषों ने)किया है पैदा , अगर कर सको तो बतलाओं. शर्म नहीं आती है तुमको, जय माता दी कहते हो. सारे वन्धन नारी खातिर, किस संसार में रहते हो. सारे वन्धन नारी खातिर , किस संसार में रहते हो.

के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

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के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

के द्वारा:

दीपक जी, (पढने से पहले जान लें कि ये प्रतिक्रिया इस ब्लॉग के लिए कतई नहीं है.)....... आप हमारी बात नहीं समझे......अगर वो किसी की भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं देता तो हमें बुरा नहीं लगता, पर जब वो दूसरों की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते है पर हमारी नहीं तो दिल दुखता है........ अरे प्रशंसा न सही आलोचना ही कर दे.....अगर हमारी पोस्ट पर किसी की प्रतिक्रिया ना आये तो बात समझ में आती है की पोस्ट अच्छी नहीं होगी, पर क्या इतनी सारी में से उन्हें हमारी एक भी पोस्ट अच्छी नहीं लगी..........तो हम इसे क्या समझे ....हमारा भी तो दिल है..... खैर ये बात हमारे लिए ज्यादा मायने नहीं रखती है......बस कभी-कभी दिमाग का दर्द जुबान पे आ जाता है......वैसे भी हम तो जब भी कोई पोस्ट अच्छी लगती है प्रतिक्रिया जरुर देते हैं.....कई बार कोई-कोई अच्छी पोस्ट पढ़ने में नहीं आ पाती और रह जाती है......हर पोस्ट पढ़ने की कोशिश तो रहती है पर अब ये नन्ही सी जान भी कितना पढ़े...

के द्वारा: aditi kailash aditi kailash

के द्वारा:

देखिये कौशल जी, अगर आप किसी से सम्मान चाहते हैं तो आपको भी सामने वाले को सम्मान देना चाहिए….आप चाहते हैं की हम आपकी रचनाओं पर कमेन्ट करें तो आप का भी फ़र्ज़ है की प्रशंसा ना सही हमारी रचनाओं पर आप कुछ आलोचना ही कर दीजिये…..अब बाकि लोगों को अच्छी लग रही है तो शायद कुछ तो अच्छा होगा ही……आपने अपनी दीदी वाली रचना पर कमेन्ट के लिए कहा था, पर उस बारे में मेरे विचार आपसे अलग हैं, इसलिए हमने कुछ नहीं लिखा….आपने देखा ही होगा कि अगर हमें कोई रचना अच्छी लगती है तो हम किसी के बिना कहे ही प्रतिक्रिया दे देते हैं, चाहे हम उसे जानते हों या नहीं…….पर हमारा भी तो दिल है…..जब वहीँ व्यक्ति अन्य लोगों कि रचनाओं पर प्रतिक्रिया देता है पर हमारी नहीं तो हमें भी तो बुरा लगेगा ना….ये सिर्फ आपके लिए नहीं हैं और भी कई लोगों के लिए हैं…..इसलिए कई बार हम जानबूझ कर अच्छी रचनाओं पर भी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं…….आखिर हमारी भी प्रतिक्रिया का कोई मोल है कि नहीं……. अगर आपको हमारी किसी बात का बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहेंगे…

के द्वारा: aditi kailash aditi kailash

के द्वारा: kmmishra kmmishra

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के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

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के द्वारा: nikhil nikhil

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